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एड. असीम सरोदे की सनद निलंबन अभिव्यक्ति स्वतंत्रता पर सीधा हमला – ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन

यह तीन माह का निलंबन आदेश केवल मार्च २०२४ में हुए एक सार्वजनिक कार्यक्रम में एड. सरोदे द्वारा की गई टिप्पणियों पर आधारित है,

एड. असीम सरोदे की सनद निलंबन अभिव्यक्ति स्वतंत्रता पर सीधा हमला – ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन

ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (AILU) ख्यातनाम मानवाधिकार वकील एड. असीम सरोदे की सनद बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा (BCMG) द्वारा निलंबित करने के निर्णय की तीव्र निंदा करती है। आरएसएस प्रेरित भाजपा सत्ता में आने के बाद से अपने विरोधी सभी आवाजों का गला घोंटने की प्रक्रिया चल रही है। राजनीतिक विरोधी, सामाजिक कार्यकर्ता, विचारक, लेखक, मानवाधिकार कार्यकर्ता, पत्रकार तथा वकील आदि लोगों को सरकार निशाना बना रही है। AILU इस बात की सार्वजनिक निंदा करती है तथा उन पर की गई इस कार्रवाई को रद्द करने की मांग करती है।

यह तीन माह का निलंबन आदेश केवल मार्च २०२४ में हुए एक सार्वजनिक कार्यक्रम में एड. सरोदे द्वारा की गई टिप्पणियों पर आधारित है, जहां उन्होंने न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली तथा संवैधानिक पदाधिकारियों की जवाबदारी पर भाष्य किया था। भाजपा के महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल पर टीका की तथा भाजपा के विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय पर असंतोष व्यक्त किया, इस कथित कारण के लिए वकीलों की महाराष्ट्र तथा गोवा बार एसोसिएशन की अनुशासन संबंधी समिति ने तीन माह के निलंबन की कार्रवाई की है।

उस कार्यक्रम में एड. सरोदे ने न्याय वितरण तंत्र में प्रणालीगत विलंब, सामान्य नागरिकों को न्यायालय में न्याय प्राप्त करने में कठिनाइयों तथा संवैधानिक पदाधिकारियों की अधिक जवाबदारी की आवश्यकता पर बोला था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने कुछ संवैधानिक पदों — जिनमें राज्यपाल का भी समावेश है — अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की पद्धति पर प्रश्न उठाए तथा लोकतंत्र में सभी संवैधानिक पदाधिकारी जनता के प्रति जवाबदार रहने चाहिए, इस आशय का कथन किया था। उनकी यह टिप्पणी रचनात्मक तथा लोकतांत्रिक भावना से की गई थी, जिसमें संवैधानिक ढांचे की संस्थाओं को पारदर्शी तथा जवाबदारी से कार्य करने की अपेक्षा व्यक्त की गई थी। शासन प्रायोजित विलंब में प्रणाली की त्रुटियों को उजागर करना किसी व्यक्ति की बदनामी करना या न्याय व्यवस्था का अपमान करना नहीं होता।

यदि सरोदे ने किसी दल के आंतरिक कार्यक्रमों में कोई टिप्पणी की हो तो वह उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। इससे उन्होंने किसी पद का अनादर नहीं किया है। स्वयं भाजपा के पूर्व राज्यपाल तथा विधानसभा अध्यक्ष ने भी इसके लिए कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं की है। ऐसे होने पर भी किसी तृतीय पक्ष तथा भाजपा कार्यकर्ता के आवेदन पर वकील बार काउंसिल की अनुशासन संबंधी समिति द्वारा निलंबन जैसी कठोर सजा देना अत्यंत अनुचित, गलत तथा दमनकारी है। एड. सरोदे ने कोई अनुशासन भंग या वकील के रूप में कोई अनैतिक आचरण नहीं किया है किंतु इसका कोई विचार बार काउंसिल द्वारा किया गया। बार काउंसिल जैसे नियामक बोर्ड को राजनीतिक प्रभावों से स्वयं को अलग रखते हुए अपने निर्णय लेने अपेक्षित होते हैं। भाजपा या किसी भी राजनीतिक शक्ति के लिए बार काउंसिल का दुरुपयोग न होने देना बार काउंसिल की जिम्मेदारी है। प्रसिद्ध पर्यावरणवादी कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर हाल ही में देशद्रोह जैसे धारा के तहत दमनकारी कार्रवाई भाजपा सरकार द्वारा की गई है। इसी प्रकार देश में पत्रकार, लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता, वकील पर कार्रवाई तथा दमन जारी है। संविधान द्वारा दिए गए जनता के अभिव्यक्ति स्वतंत्रता को अबाधित रखना सभी कानूनी संस्थाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

इस कार्यक्रम के बाद भाजपा व आरएसएस से संबंधित व्यक्तियों ने महाराष्ट्र तथा गोवा बार एसोसिएशन (BCMG) के पास शिकायत दर्ज की। उस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए बार काउंसिल ने १२ अगस्त २०२५ को एड. सरोदे की सनद तीन माह के लिए निलंबित करने का आदेश पारित किया। किंतु यह आदेश उन्हें ३ नवंबर २०२५ को अर्थात लगभग तीन माह बाद सूचित किया गया। आदेश सूचित करने में विलंब तथा आदेश के कारण स्पष्ट न करने से प्रक्रियात्मक न्याय तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के पालन के संबंध में गंभीर संदेह उत्पन्न हुए हैं। कानून व्यवसाय के सदस्यों ने चिंता व्यक्त की है कि अनुशासनात्मक प्रक्रिया बाहरी दबाव या राजनीतिक विचारों से प्रभावित हुई प्रतीत होती है, क्योंकि लोकतांत्रिक मत व्यक्त करने पर दंडात्मक कार्रवाई न तो न्यायोचित है, न ही संविधान में गारंटीकृत अभिव्यक्ति स्वतंत्रता से सुसंगत है।

स्वस्थ लोकतंत्र बनाए रखने के लिए वकील के रूप में न्याय व्यवस्था, सरकारी कृत्यों या संवैधानिक पदाधिकारियों पर टीका करना वकील का अधिकार तथा कर्तव्य है, प्रश्न उठाना तथा सुधार मांगना लोकतांत्रिक अधिकार है; ऐसे आवाजों को दबाना दुष्कृत्य है। अनुशासनात्मक कार्रवाई का उपयोग कर वकीलों को चुप कराना कानून व्यवस्था को ही अन्याय करना है।

AILU मांग करती है कि बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा तत्काल निलंबन वापस ले तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) हस्तक्षेप कर अनुशासनात्मक तंत्र को स्वतंत्र, पारदर्शी तथा राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखने की गारंटी करे। संवैधानिक मत व्यक्त करने पर वकील को निशाना बनाना खतरनाक है तथा लोकतंत्र की स्वतंत्रताओं के मूल आधार पर ही प्रहार है इसलिए इसे कदापि सहन नहीं किया जाएगा। एड. असीम सरोदे को उनकी सनद तत्काल बहाल की जाए। ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन ॲड. असिम सरोदे के साथ पूर्ण एकजुटता से खड़ी है।

एड. बाबासाहेब वावळकर एड. चंद्रकांत बोजगर

(अध्यक्ष, AILU, महाराष्ट्र) (सचिव, AILU, महाराष्ट्र)

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