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शिक्षा ही समाज को सही राह दिखाती है — डा. भारती गाँधी, संस्थापिका-निदेशिका, सी.एम.एस.

शिक्षा ही समाज को सही राह दिखाती है -- डा. भारती गाँधी, संस्थापिका-निदेशिका, सी.एम.एस.

शिक्षा ही समाज को सही राह दिखाती है
— डा. भारती गाँधी, संस्थापिका-निदेशिका, सी.एम.एस.
लखनऊ, 23 फरवरी। सिटी मोन्टेसरी स्कूल, प्रधान कार्यालय के सभागार में आयोजित संगोष्ठी में बोलते हुए युवा वक्ता श्री शोभित अग्रवाल ने कहा कि समाज में शिष्टाचार, दयालुता, सच बोलना, सहनशीलता और आपसी विश्वास जैसी भावनाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है। खास बात रही कि इस संगोष्ठी में वर्ष 1959 में सी.एम.एस. में प्रवेश लेने वाले पहले 10 विद्यार्थियों में शामिल श्री महेश अग्रवाल एवं श्री नरेश कपूर ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी। इसके अलावा, श्रीमती मोना गाँधी एवं श्री राबर्ट गाँधी समेत समेत विभिन्न धर्मों के अनुयायी शामिल हुए और बच्चों को सामाजिक दायित्व की शिक्षा के साथ-साथ आध्यात्मिक शिक्षा दिये जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। संगोष्ठी का संचालन सी.एम.एस. संस्थापिका-निदेशिका डा. भारती गाँधी ने किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में डा. भारती गाँधी ने कहा कि समाज में एकता एवं भाईचारे की भावना को लगातार सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। वैचारिक मतभेद होना सामान्य बात है परन्तु मनुष्य में शिष्टाचार, सहनशीलता, एवं आपसी सामन्जस्य की भावना अवश्य होनी चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि शिक्षा ही समाज को सही राह दिखाती है। डाॅ. भारती गाँधी ने विश्व-शान्ति की स्थापना हेतु वैश्विक एकता एवं विश्व सरकार की आवश्यकता पर भी विचार रखे, जिससे आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित, समृद्ध और खुशहाल भविष्य प्रदान किया जा सके। श्री राबर्ट गाँधी ने इस अवसर पर कहा कि ईश्वर का समस्त ज्ञान मानव जाति को उनके अवतारों के माध्यम से दिया गया है, ऐसे में हमें सदैव ही ईश्वरीय अवतारों की शिक्षाओं का पालन करना चाहिए। श्रीमती मोना गाँधी ने कहा कि विद्यार्थियों को अच्छे विचारों को अपनाने एवं नकारात्मक विचारों को त्यागने की शिक्षा दी जानी चाहिए। उन्होंने एक बहुत ही प्रेरणादायी भजन ‘मंगलमय है वह जगह जहाँ प्रभु महिमा गाई जाती है’ सुनाया।
संगोष्ठी में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए पारस्परिक सहयोग, सद्भाव और सेवा भावना को जीवन का आधार बनाने पर बल दिया। संगोष्ठी का समापन ‘आज देश को नये विचार चाहिए…’ के प्रेरक कविता पाठ एवं प्रसाद वितरण के साथ हुआ।

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