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कायस्थ समाज ने सिर्फ कलम ही नहीं, तलवार की भी पूजा की: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में श्री चित्रगुप्त मंदिर सभा की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह को सम्बोधित किया

मुख्यमंत्री ने गोरखपुर में श्री चित्रगुप्त मंदिर सभा की
नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह को सम्बोधित किया

कायस्थ समाज ने सिर्फ कलम ही नहीं, तलवार की भी पूजा की: मुख्यमंत्री

कलम और तलवार दोनों के समन्वय से समाज
व राष्ट्र की व्यवस्था चलती, कायस्थ समाज यह जानता है

कायस्थ समाज के महापुरुषों ने जीवन
के हर क्षेत्र में अपना विशिष्ट योगदान दिया

प्रदेश सरकार प्रयागराज में डाॅ0 राजेन्द्र प्रसाद
के नाम पर नेशनल लाॅ यूनिवर्सिटी बना रही

श्री चित्रगुप्त मंदिर सभा जैसी संस्थाएं समाज के अच्छे कार्योंं
को हाइलाइट करने तथा बुराई को दूर करने के लिए प्रयास करें

बक्शीपुर चैक का नाम भगवान श्री चित्रगुप्त के नाम पर किया
जाना सराहनीय पहल, इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया जाए: मुख्यमंत्री

लखनऊ: 09 सितम्बर, 2025:ः उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि जीवन का ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है, जिसमें कायस्थ समाज के महापुरुषों ने अपना विशिष्ट योगदान न दिया हो। कायस्थ समाज ने सिर्फ कलम ही नहीं, तलवार की भी पूजा की है। यह समाज यह जानता है कि कलम और तलवार दोनों के समन्वय से ही समाज व राष्ट्र की व्यवस्था चलती है।
मुख्यमंत्री जी आज गोरखपुर क्लब में आयोजित श्री चित्रगुप्त मंदिर सभा, गोरखपुर की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह के अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।
मुख्यमंत्री जी ने समारोह में नवनिर्वाचित कार्यकारिणी को बधाई देते हुए कहा कि यह माना गया है कि सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा की विशिष्ट काया से कायस्थ का प्रादुर्भाव हुआ है। भगवान श्री चित्रगुप्त को कर्म की साधना के अनुसार सृष्टि का लेखा-जोखा रखने वाले और श्रेष्ठ कार्य करने की प्रेरणा देने वाले भगवान की प्रतिष्ठा प्राप्त है। उन्होंने कहा कि कायस्थ समाज को प्रबुद्ध समाज माना जाता है। धर्म, अर्थ, प्रशासन, व्यवसाय, विधि, कला, चिकित्सा, शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में इस समाज ने विशिष्ट योगदान दिया है।
गुलामी के कालखण्ड में देश जब भारतीयता की विस्मृति के दौर से गुजर रहा था, तब शिकागो में ‘गर्व से कहो हम हिन्दू हैं’ का उद्घोष कर भारतीयता के मानव कल्याण के मंत्र का स्मरण कराने वाले स्वामी विवेकानन्द कायस्थ कुल परम्परा से ही थे। स्वाधीनता आंदोलन में ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हंे आजादी दूंगा’ का उद्घोष करने वाले नेताजी सुभाष चन्द्र बोस इसी परम्परा के थे। जब सभी मत, मजहब, क्षेत्र, भाषा को एकसूत्र में पिरोने वाले संविधान के निर्माण की बात आयी, तो संविधान सभा के अध्यक्ष के लिए डाॅ0 राजेन्द्र प्रसाद का नाम सामने आया, जो देश के पहले राष्ट्रपति बने। डाॅ0 राजेन्द्र प्रसाद इसी परम्परा के थे।
स्वतंत्र भारत में देश के दुश्मनों को जवाब देने वाले, वर्ष 1965 की लड़ाई में नाको चने चबवाकर पाकिस्तान को घुटनों पर लाने वाले श्री लाल बहादुर शास्त्री जी भी इसी परम्परा के थे। वर्ष 1975 में जब देश में लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा था, तब लोकतंत्र को बचाने के लिए सामने आए जयप्रकाश नारायण जी इसी समाज के थे। यही नहीं जब अयोध्या में राम मंदिर बनने की बात दुरूह लग रही थी, तब इसी समाज के महर्षि महेश योगी ने हाॅलैण्ड में भगवान श्रीराम के नाम का सिक्का जारी कर दिया था। हिन्दी साहित्य में उपन्यास की विशिष्ट शैली देने वाले मुंशी प्रेमचन्द जी भी इसी समाज के महापुरुष थे।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि शालीनता और सहजता व्यक्ति के आन्तरिक गुण हैं। उसमें भी राष्ट्र प्रेम और क्रांति के ज्वार होते हैं। स्वामी विवेकानन्द, नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, डाॅॉ राजेन्द्र प्रसाद, श्री लाल बहादुर शास्त्री, श्री जयप्रकाश नारायण, मुंशी प्रेमचन्द आदि ने यही सिद्ध किया। कोई ऐसा दौर नहीं, जब कायस्थ समाज ने देश के लिए योगदान न दिया हो। डाॅॉ राजेन्द्र प्रसाद देश के ऐसे पहले राष्ट्रपति हैं, जो माघ मेले के दौरान एक माह प्रयागराज में प्रवास कर सनातन संस्कृति को मजबूती देने का कार्य करते थे। उनकी साधना जाति नहीं, बल्कि देश के लिए थी। उनके योगदान के सम्मान में प्रदेश सरकार प्रयागराज में नेशनल लाॅ यूनिवर्सिटी बना रही है। देश की पुरातन संस्थाओं में कायस्थ पाठशाला, प्रयागराज का नाम आता है। शिक्षा के क्षेत्र में कायस्थ समाज के लोगों द्वारा स्थापित महात्मा गांधी इण्टर और डिग्री काॅलेज सहित अनेक संस्थाएं भी उल्लेखनीय हैं।
मुख्यमंत्री जी ने प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता श्री अमिताभ बच्चन का जिक्र करते हुये कहा कि कला क्षेत्र में श्री अमिताभ बच्चन भी कायस्थ समाज से हंै और उनमें काफी सहजता है। आज भी लोग उन्हें छोरा गंगा किनारे वाला कहकर याद करते हैं। खुद वे भी कहते हैं कि वह प्रयागराज को कभी नहीं भूल सकते। उनके मन में अपनी धरती के प्रति अत्यन्त आत्मीयता का भाव है। इसी क्रम में श्री शत्रुघ्न सिन्हा के कई बार गोरखपुर आने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसके महापुरुषों से बनती है। समाज की संस्थाओं को चाहिए कि वे वर्तमान और भावी पीढ़ी को प्रेरणा देने के लिए महापुरुषों के जीवन से उन्हें परिचित कराएं। श्री चित्रगुप्त मंदिर सभा जैसी संस्थाएं समाज के अच्छे कार्योंं को हाइलाइट करने तथा बुराई को दूर करने के लिए प्रयास करें।
नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह में श्री चित्रगुप्त मंदिर सभा की तरफ से पूर्व अध्यक्ष श्री हरिनंदन श्रीवास्तव द्वारा बक्शीपुर चैक का नाम भगवान श्री चित्रगुप्त के नाम पर किए जाने की मांग पर मुख्यमंत्री जी ने महापौर को प्रस्ताव बनाने को कहा। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बक्शीपुर बाजार की पहचान ही कलम और किताब से है। ऐसे में यहां के चैराहे का नाम भगवान श्री चित्रगुप्त को समर्पित होना सराहनीय पहल होगी।
कार्यक्रम में मंच पर जाने से पूर्व, मुख्यमंत्री जी ने भगवान श्री चित्रगुप्त जी के चित्र पर पुष्पार्चन किया।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डाॅ0 अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं, बल्कि उत्तम प्रदेश है और अब सर्वोत्तम प्रदेश बनने की राह पर है। यह परिवर्तन मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में सम्भव हुआ है। मुख्यमंत्री जी ने कानून-व्यवस्था मजबूत कर उत्तर प्रदेश को निवेश का सर्वोत्तम गंतव्य बना दिया है। उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन रहा है। उन्होंने कायस्थ समाज के सभी लोगों से वोटर बनने और प्रदेश व देश की बेहतरी के लिए वोट डालने की अपील की।
गोरखपुर के महापौर डाॅ0 मंगलेश श्रीवास्तव ने श्री चित्रगुप्त मंदिर सभा गोरखपुर के नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्री राजेश चन्द्र श्रीवास्तव, मंत्री श्री अम्बरीश कुमार श्रीवास्तव सहित कार्यकारिणी के 13 पदाधिकारियों, 100 से अधिक कार्यकारिणी सदस्यों, 16 समितियों के संयोजकों व सह संयोजकों को शपथ दिलायी।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधिगण व अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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