बीबीएयू के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा “स्टार्टअप्स के लिए पूंजी जुटाना और फंड प्रबंधन” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन
कार्यक्रम का उद्देश्य नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना और स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय प्रबंधन एवं पूंजी जुटाने के तरीकों की जानकारी देना था।

*बीबीएयू के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा “स्टार्टअप्स के लिए पूंजी जुटाना और फंड प्रबंधन” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन*
भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (BBAU), लखनऊ के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा “स्टार्टअप्स के लिए पूंजी जुटाना और फंड का प्रबंधन” विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना और स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय प्रबंधन एवं पूंजी जुटाने के तरीकों की जानकारी देना था।
कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति *प्रोफेसर राजकुमार मित्तल* के मार्गदर्शन में हुआ। उन्होंने बताया आज का युग नवाचार और स्टार्टअप का है, जहां युवा वर्ग अपने नए विचारों को व्यवसाय में बदलकर देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि पूंजी जुटाना किसी भी स्टार्टअप के लिए सबसे बड़ा प्रारंभिक कदम होता है, और इसके लिए सही मार्गदर्शन, नेटवर्क और रणनीति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसे आयोजनों के माध्यम से छात्रों को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है।
*इंस्टीट्यूशनल इनोवेशन काउंसिल के अध्यक्ष *प्रोफेसर नवीन कुमार अरोड़ा* ने कहा कि नवाचार तभी संभव है जब छात्रों को सही दिशा, संसाधन और प्रोत्साहन मिले। उन्होंने IIC द्वारा की जा रही विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी और बताया कि विश्वविद्यालय स्टार्टअप्स को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है।
कार्यक्रम के *मुख्य अतिथि प्रोफेसर सनातन नायक*, अध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग, बीबीएयू ने भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम की गहराई से व्याख्या की। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बन चुका है, और युवाओं को इसमें आगे आने के लिए सरकारी योजनाओं, निजी निवेश और सही वित्तीय समझ की आवश्यकता है। उन्होंने फंडिंग के विभिन्न प्रकार जैसे सीड फंडिंग, वेंचर कैपिटल, एंजेल इन्वेस्टमेंट आदि के बारे में छात्रों को विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम के *विशिष्ट अतिथि और विषय विशेषज्ञ प्रोफेसर मोहम्मद ओसामा*, तमिलनाडु सरकार के मिशन से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि तमिलनाडु सरकार किस प्रकार से स्टार्टअप्स को सहयोग प्रदान कर रही है। उन्होंने निवेश जुटाने की रणनीतियों, पिचिंग तकनीकों, सरकारी योजनाओं और स्टार्टअप नीति पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि एक उद्यमी को किस प्रकार अपने विचार को निवेशकों के सामने प्रस्तुत करना चाहिए।
इस संगोष्ठी की *संयोजक डॉ. राजश्री*, विभागाध्यक्ष, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, बीबीएयू ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को वित्तीय जागरूकता प्रदान करना और उन्हें स्टार्टअप की शुरुआत के लिए तैयार करना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय छात्रों में उद्यमिता की भावना को प्रोत्साहित कर रहा है और यह संगोष्ठी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
कार्यक्रम में *प्रोफेसर आर.ए. खान, **डॉ. धीरेंद्र पांडे, **डॉ. पी.के. चौरसिया, **डॉ. अलका, **डॉ. अमित कुमार सिंह* और *डॉ. अभिषेक वर्मा* सहित सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सभी प्राध्यापकों ने सक्रिय भागीदारी की। उन्होंने अपने अनुभव और विषय संबंधी जानकारी को साझा किया और छात्रों को स्टार्टअप से जुड़ी जमीनी हकीकतों से अवगत कराया।
संगोष्ठी में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शोधार्थियों और नवोदित उद्यमियों ने भाग लिया। प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान छात्रों ने विशेषज्ञों से स्टार्टअप पंजीकरण, वित्तीय प्लानिंग, निवेशकों से संपर्क, मार्केट एनालिसिस और उत्पाद विकास जैसे विषयों पर सवाल पूछे जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने स्टार्टअप फंडिंग के विभिन्न चरणों – जैसे बूटस्ट्रैपिंग, सीड फंडिंग, सीरीज फंडिंग , इक्विटी शेयरिंग और फंड मैनेजमेंट की प्रक्रिया आदि को तकनीकी रूप से सरल भाषा में समझाया। उन्होंने छात्रों को यह भी बताया कि किसी भी स्टार्टअप को फंडिंग तभी मिलती है जब उसमें स्पष्ट विज़न, ट्रैक्शन और संभावनाएं होती हैं।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजश्री द्वारा दिया गया। उन्होंने सभी आमंत्रित अतिथियों, विशेषज्ञों, विश्वविद्यालय प्रशासन, छात्रों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी इस प्रकार के व्यावहारिक ज्ञानवर्धक आयोजनों की घोषणा की।
यह संगोष्ठी छात्रों के लिए न केवल प्रेरणादायक रही बल्कि उन्हें अपने स्टार्टअप विचारों को वास्तविकता में बदलने हेतु आवश्यक वित्तीय रणनीतियों और संसाधनों की जानकारी भी प्राप्त हुई। BBAU द्वारा किया गया यह प्रयास निश्चित रूप से विश्वविद्यालय को स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।









